ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मिथ्या!

शोर का सन्नाटा!!!

है ये शोर का सन्नाटा,यहां हर कोई भन्नाता,है ढपली है राग अपना,औ दूसरों पे चिल्लाता, है ये शोर का सन्नाटा… दरवाज़े पे कान लगाता,आवाज़ें सुन …