बरसे फाल्गुन फुहार!!!
ना बरसे फाल्गुन फुहार,बिखरे ना हीं रंग बौछार,ना गाये होरी मेघ मल्हार,बिनती करे हैं कन्हैया से,तुम्हरी राधा तुम्हरा इंतजार,औ मन ही मन बैठी हैं ठान… …
ना बरसे फाल्गुन फुहार,बिखरे ना हीं रंग बौछार,ना गाये होरी मेघ मल्हार,बिनती करे हैं कन्हैया से,तुम्हरी राधा तुम्हरा इंतजार,औ मन ही मन बैठी हैं ठान… …
स्याह के कई छाया रंग बिखरे हुए हैं, हर इक छाया की अपनी अलग दुनिया है…जहां से जहां तक देख पा रहा हूं वहां पर …
ज़िंदगी मद्धम मद्धम सी,गुनगुनाती चली जा रही,सुनते थे हम ख़ामोश बैठे,अकेले में आकाशवाणी,बिना दिए अपनी वाणी, गीतमाला बिनाका की,कार्यक्रम विविध भारती,ग्यारह बजे की सुई,चुप सारी …
दूर से आती आवाज़ के जब पास आ गये,बारिश के नदी में उतरने से सैलाब आ गये, ख़ामोश थे लब औ थरथराहट थी सांसों में,हलचल …
कभी यूँभी हुआ है मुहब्बत के थाने में,उन्हीं के हो गये हम उनको रंग लगाने में, गुजिया और मिठाई की बातें बनाने में,साँवली सूरत पर …
कुछ ख़याल छुटपन के,ज़हन में तैरते हैं ऐसे,के वो ख़याल नहीं हैं,गुज़रते पल हैं देखे,सच में बैठे हों पास जैसे, मिट्टी गूंध कर हाथों से,सौंधी …
हूँ कलाकार, किरदार सोच रहा हूँ,मुख़्तलिफ़ रँग बार बार भर रहा हूँ, अख़लाक़ रच के मन से गढ़ रहा हूँ,ख़ुद को क़िताब की तरह पढ़ …
अवधपुरी से आई रे “गुजरिया”,इंद्रप्रस्थ से आया रे “सांवरिया”,मिलन ये कैसा अद्भुत रसिया,होरी मुबारक़, चखिये गुजिया, आज अवध की होरी है रसिया,उड़त गुलाल रंग भरे …
बावले से दिन, बावली सी रात हैहम साथ साथ, गज़ब की बात है , उम्र बराबर, साल गुज़ारे हैं हमने,फिर भी लगे यूं, कल की …
आज रंग तन मन,रंग भरो अंतर्मन,मन से मन संगम,हृदय बने विहंगम, आज कर अर्पण,अहंकार भरा मन,होली हो राधे संग,हर दृश्य मनोरम, मुरलीधर वृंदावन,बसे हर राधा …