ख़यालों का इक टुकड़ा,
क़ैफ़ियत से आ जुड़ा,
और ना जाने कब से,
बेचैनी है पैदा कर रहा,
कोई दे दे वक़्त ज़रा,
अंदर तक सोचने का,
इधर काफ़ी वक़्त से,
ये दिल बेचैन रह रहा,
सबब जानने की क़ोशिश,
करने की ज़रूरत नहीं,
आजकल हर बात पर,
बड़ी हलचल है कर रहा,
कभी लगे के वक़्त आ गया,
कभी ये सोच के घबरा गया,
कभी बैठे बैठे दिल ने कहा,
बेचैनियों को कम कर ज़रा,
अपने दिल की सुन नहीं रहा,
दिमाग़ इस बात में लगा रहा,
सच है कि इक दिन है मरना,
सोच कर बड़ा आराम मिला,
दिल पे तनाव ज़रा कम हुआ,
के दिल की अपनी इक उम्र है,
कैसे जियेगा उस उम्र से ज़्यादा,
दिमाग बोला दिल पगला गया,
दिल ने कहा दिल से करें वादा,
धड़कूंगा जब तक है धड़कना,
करूंगा वो जिसमें मेरी हो हाँ,
जाने के बाद कौन जाने कहाँ…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
बहुत ख़ूब –
दिल ने कहा दिल से करें वादा,
धड़कूंगा जब तक है धड़कना,
करूंगा वो जिसमें मेरी हो हाँ,
जाने के बाद कौन जाने कहाँ