ज़िंदगी की सरजमीं पर...
सच!!!

पलक झपकते ही!!!

गुज़र रहे थे उस गली,जो थी वीरान पड़ी,सामने थी वो खड़ी,अकस्मात् देख उसे,हमने पूछा कौन हो,वो बोली…ज़िंदगी!हमने कहा किसकी?वो बोली…तुम्हारी… हाथ पैर कांपने लगे,सिहरन सी …

क्या फ़ायदा!!!

करने लगे सजदा,धीमे से आवाज़ आई,ऊपरवाला ऊपर रहता,उठ खड़े हुए फ़ौरन,दोनों हाथ उठा कर,मांगने लगे दुआ… चल रहा रतजगा,कर्कश ध्वनि में,चीख चीख बताते व्यथा,हो हल्ला …

ग़ुलाम आज़ादी के परे!!!

कैनवास पे रंगों के छींटे यूं हैं उड़ेले,के ज़िंदगी ने कहा चलो इनमें रंग भरें, आबशारों को देख रहे उल्टे पड़े हुए,लगे के जैसे आसमां …

दो जून की रोटी!!!

ख़ुद पे ना गुज़रे, मुश्क़िल है समझ पाना,हैं हज़ारों जिन्हें मयस्सर नहीं इक दो दाना, नहीं हासिल, जिसे अच्छा कहे ज़माना,है मुफ़लिसी वो दाग़, मुश्क़िल …

धौकनी!!!

धड़कनें बेचैन और मैं हूं ख़ामोश खड़ा,बेवजह की उलझनों को हूं सुलझा रहा, हैं क्या कुछ ऐसा के जिससे हूं डरा डरा,भूचाल है मेरे अंदर, …