ज़िंदगी की सरजमीं पर...
सच!!!

बूढ़े!!!

कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …

जंग!!!

दिन गिनते गिनते रात भई,रात भी ना कोई बात हुई,रात गुज़री फिर रात हुई,ना जाने कब वो रात हुई, वक़्त गुज़रा रात ना गई,सारा दिन …

खालीपन!!!

खालीपन देखो आ बैठा,कितनी बातें करता रहा,मिल कर अजनबी लगा,रात भर यूँही सोचता रहा,खालीपन किस बात का,दिल कहता बेचैन मन का,मन करता अपने मन का,वो …