सूखी आस!!!
नदिया किनारे इक गांव,है प्यासा और नहीं छांव, मिट्टी पर, निशां नहीं पांव,नदी सूखी कैसे चले नाव, प्यास है आस, नहीं बरसात,आशा है, विश्वास से …
नदिया किनारे इक गांव,है प्यासा और नहीं छांव, मिट्टी पर, निशां नहीं पांव,नदी सूखी कैसे चले नाव, प्यास है आस, नहीं बरसात,आशा है, विश्वास से …
कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …
दिन गिनते गिनते रात भई,रात भी ना कोई बात हुई,रात गुज़री फिर रात हुई,ना जाने कब वो रात हुई, वक़्त गुज़रा रात ना गई,सारा दिन …
खालीपन देखो आ बैठा,कितनी बातें करता रहा,मिल कर अजनबी लगा,रात भर यूँही सोचता रहा,खालीपन किस बात का,दिल कहता बेचैन मन का,मन करता अपने मन का,वो …
रोज़ अख़बार पढ़ कर सोचता हूं,आख़िर क्यों मैं अख़बार पढ़ता हूं, बचपन से वही ख़बर पढ़ता रहा हूं,सोचता हूं कि मैं क्या पढ़ रहा हूं …