ज़िंदगी की सरजमीं पर...
बिटिया!!!
बिटिया!!!

बिटिया!!!


कली की तरह खिली,
तुम्हारी गोद में मिली,
इक छोटी सी आशा,
छोटी सांसें भरने लगी,
हमें बिटिया मिली!!!

प्रफुल्लित हुई ज़िंदगी,
हमसे पूछा ज़िंदगी ने,
बिटिया पा के ख़ुश हो,
हमारी आंख भर गयी,
और कुछ नहीं चाहिए जी,
आख़िर हमें ज़िंदगी मिली…

समय के साथ हुई बड़ी,
जोड़ी जब कड़ी से कड़ी,
हमने बिटिया ही चाही,
जीने की पुड़िया मिली,
अपनी तरह की अनोखी…

नेक सरल सुंदर मन की,
उसकी ज़िंदगी उसकी,
वो आगे चले बढ़े पढ़े,
इच्छाएं पूरी हों उसकी,
जिए भरपूर अपनी ज़िंदगी…

भर भर के रहे तमन्नाएं तेरी,
पूरा करने की इच्छाएं तेरी,
बना ख़ुद से ज़िंदगी अपनी,
दिल दिमाग की तू साम्राज्ञी,
तू सशक्त सम्पूर्ण तू पार्वती…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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