इक बच्ची को प्रार्थना देख करते,
और हर रोज़ वही करते करते,
उत्सुकता जागी पुजारी मन में,
जानना चाहा कि क्या प्रार्थना है,
इक दिन जा सुना उसने छुप के,
समझ नहीं आया कुछ भी उसे,
बच्ची से पूछ बैठा थक हार के,
कौन सी प्रार्थना कहती हो उनसे,
देख पुजारी को बोला बच्ची ने,
मुझे कोई प्रार्थना आती नहीं है,
मगर वर्णमाला पूरी याद है मुझे,
बस वही सुना देती हूं रोज़ उन्हें,
पर बेटी ये कोई प्रार्थना नहीं है,
पूजा करनी है प्रार्थना सीख ले,
बच्ची बोली पूरी वर्णमाला में,
सारे शब्द आते हैं प्रार्थना के,
जो भी प्रार्थना सुननी हो उन्हें,
इसी वर्णमाला में से चुन लें,
प्रार्थनाएं ही प्रार्थनाएं हैं इनमें,
मुझे जो आती है कह दी मैंने,
सुन के पुजारी जी दंग रह गये,
बच्ची ने सिखा दी भक्ति उन्हें,
मन से की गयीं हों जब प्रार्थनाएं,
क्योंकर प्रार्थनाएं बांधे शब्दों में…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Beautiful. The depth in simple things can be highly profound
Beautiful prayer
अति उत्तम