ज़िंदगी की सरजमीं पर...
बस इक ही लता!!!
बस इक ही लता!!!

बस इक ही लता!!!

बसंत बहार फागुन की धार,
मालकौंस मियां की मल्हार,
भैरव भैरवी यमन कल्याण,
राग दरबारी बसंत व केदार,
तिलक कामोद मेघ मल्हार,
पूर्या धनाश्री थाट बिलावल,
वृंदावनी सारंग राग बिहाग,
अनगिनत राग साधे इक स्वर,
बरस रहा अमृत मन मनोहर,
सौ सालों का अनवरत सफ़र,
सुर श्रोताओं की इक मंज़िल,
स्वर कोकिला लता मंगेशकर,

हिंदुस्तान व विश्व शांत नमन,
आज कोयल चुप, चुप है गगन,
पर प्रकृति झूम के हो रही मगन,
उसकी धरोहर चली अपने घर,
आज थाप बज रही तबले पर,
आज वाद्यों ने लता को देखकर,
सुरीले रसीले मधुर हैं साधे स्वर,
सा है धरती पर नी है नभ पर,
सा रे गा मा  पा धा नी के स्वर,
वाणी कोमल बोल मद्धम तीव्र स्वर,
हैं हरसू हर तरफ़ बस लता मंगेशकर…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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