खालीपन देखो आ बैठा,
कितनी बातें करता रहा,
मिल कर अजनबी लगा,
रात भर यूँही सोचता रहा,
खालीपन किस बात का,
दिल कहता बेचैन मन का,
मन करता अपने मन का,
वो जहां कुछ ना हो रखा
वो जहां कुछ ना हो रहा,
वो दिल की गहराई का,
वो ख़ामोश तन्हाई का,
खाली था वो खाली रहा,
शोर जो ना सुनायी पड़ा,
ख़ुद को ना दिखायी पड़ा,
वो कागज़ पे ना उतर सका,
वो क़लम जो ना कह सका,
वो लफ़्ज़ जो कि मौन रहा,
वो मौन है कि बोलता रहा,
अंदर तक कुछ हिला गया,
शायद ख़ुद से मिला गया,
कुछ पल गुज़रे भुला दिया,
वो पल में सदियां बिता गया,
सदियों को पल में समा गया,
क़तरा क़तरा यूँ बयां हुआ,
इक क़तरा उसका चेहरा बना,
इक क़तरा उसका मोहरा बना,
इस तरह फिर वो ज़ाहिर हुआ,
हर जगह फिर वो हाज़िर हुआ,
पर वो कोई क़िरदार नहीं था,
और वो कोई घरबार नही था,
खाली हो के भी भारी था,
वो बिना बात के जारी था,
वो सारे मन पर हावी था,
आख़िर वो क्या खाली था,
या ज़हन की पाली अवस्था ,
खालीपन खाली वक़्त ढूंढ़ता,
मन जैसे ही वो वक़्त देने चला,
खालीपन तैयार था, आ बैठा,
दिल के कोने में रिक्त स्थान था,
खालीपन जब से ये जान बैठा,
वो बैठगा अंदर, है ठान बैठा,
वही खालीपन आज आ बैठा…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Nice, heart touching
Kuch baat to hogi es khalipan me.. koi ehsaas to hoga jo chu jata ha har man ko….. Loved the “Khalipan”