बोलने से पहले, तीखा चखा कीजिये,
चिकनाई हटेगी ज़ुबां से, मज़ा लीजिये,
अनर्गल कभी कभी बड़बड़ा लीजिये,
ज़हन पे ज़ोर मगर, आने ना दीजिये,
ख़ुद को परेशाँ कम कम ज़रा कीजिये,
खीझ जब आये, ख़ुद से मज़ा लीजिये,
बस इतनी सी दरकार है मुहब्बत की
चाँद उतार लाइये चाँदनी बिछा दीजिये,
परेशान से हो जाते हैं आप हर बात पर,
दिल ऐ नादान पे ज़ुल्म किया ना कीजिये,
आसमान से हर रोज़ बरसती हैं रहमतें,
दोनों हाथ उठा कर सजदा अदा कीजिये,
ना आये ऐतबार किसी पे तो ना कीजिये,
ज़िंदगी आपकी है आप ही बना लीजिये,
आपके ही नहीं औरों के ग़म भी हैं यहाँ,
अपने ग़मों की फ़ेहरिस्त पहले छपा दीजिये,
कभी कभी हम थक जाते हैं अपने से,
रुकिये, तब्सिरा कीजिये, मुस्कुरा दीजिये,
कोई कोहराम ना मच जायेगा दुनिया में,
ज़हमत हर बात पर उठाया ना कीजिये,
और भी हैं जो अपना फ़र्ज़ समझते हैं,
ऐतबार रखिये उनपर, भरोसा कीजिये,
अहसास ऐ ज़िंदगी को रूह के आईने में,
साफ़ साफ़ देखिये और दिखाया कीजिये,
क्या क़माल है कि दुनिया चल रही है,
इस क़माल में बढ़ के इज़ाफ़ा कीजिये,
है हर इक ग़म की रात तो आख़िर रात ही,
उजाले नहीं मोहताज, रातों को बता दीजिये,
देख के उनको, जो सर चढ़ता हो जुनून,
ख़ूबसूरत अलफ़ाजों में उन्हें सजा दीजिये,
इतिहास बदल सकते होते तो बदल देते,
रूहानी दरबानों से खुल के कहा कीजिये,
माफ़ी चाहते हैं पहले, जो कहने जा रहे हैं,
ख़ुद को औरों की सोच पर मत मढ़ा कीजिये,
इत्तेफ़ाक़ नहीं, हम जैसे हैं, हम वैसे ही हैं,
“मनु” को जानना हो, ज़िंदगी पढ़ा कीजिये,
राह चलते लोगों से अक़्सर मिला कीजिये,
जिंदिगी ख़ुद कहेगी कभी तो जिया कीजिये,
“मनु शरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava