ज़िंदगी की सरजमीं पर...
बातचीत!

दर्जन भर दर्द!!!

दर्जनों में दर्द,सैकड़ों में ख़ुशी,जो कुछ बची,ज़िंदगी ही होगी… आसमाँ बिछा कर,चादरें समेट लीं,पैर पसारने की,जगह नहीँ छोड़ी… पी गये हैं दरिया,समंदर है बाक़ी,छोटे से …

ख़ुद से मुहब्बत कीजिये!!!

बोलने से पहले, तीखा चखा कीजिये,चिकनाई हटेगी ज़ुबां से, मज़ा लीजिये, अनर्गल कभी कभी बड़बड़ा लीजिये,ज़हन पे ज़ोर मगर, आने ना दीजिये, ख़ुद को परेशाँ …

कल दोपहर बाद!!!

कल दोपहर बाद,शाम ने,महफ़िल थी सजायी,दिन अच्छा ख़ासा दूर था,सुबह ज़रा क़रीब थी और,रात इठलाते हुए थी आई… कल शाम जब,महफ़िल में,रात होने को शामिल …

मुस्कुराते दर्द!!!

चुभते अहसासों ने आ घेरा,नम आंखों ने बरसना चाहा,यूं चश्मे सा बह जाना चाहा,मासूम इक अश्क़ बहा दिया, वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया… टीस …

दिल!!!

किसी की थी महफ़िल,महफ़िल में उनसे मिल,हैं वो नफ़ीस शख़्सियत,इक दिन पूछा उन्होंने,कौन हो तुम,हमने कहा आपका दिल, क्या मिलेगा याद करके,जो ना गुज़ारे साथ …