अच्छा ख़ासे परेशान हैं तबसे,
जानने लगे हैं ख़ुद को जबसे,
ख़ूब भाती हैं वो बातें हमको,
जिनमें हमें छोड़ दूसरे हों फंसे,
तबियत ख़राब हो गई तबसे,
हम ही हैं मुसीबत जाना जबसे,
हमारे पास था पासा वो वाला,
जहां फेंका बाज़ी जीती सबसे,
तबियत तरबियत पायी ऐसी,
बवाल जहां, पाये जाते वहीं पे,
बे इंतेहा सुकूं, दूसरे की बुराई,
मालिक हैं ऐसी संकरी सोच के,
हम श्रेष्ठ बाक़ी सब अवशेष,
अब तो बस भगवान ही हैं बचे,
मांगे मनु ए मौला, इल्म आ जाये,
धड़कनों में ज़िंदा, दिमाग़ चल बसे,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
वाह क्या बात