ज़िंदगी की सरजमीं पर...
कटाक्ष!!!

धड़कनों में ज़िंदा!!!

अच्छा ख़ासे परेशान हैं तबसे,जानने लगे हैं ख़ुद को जबसे, ख़ूब भाती हैं वो बातें हमको,जिनमें हमें छोड़ दूसरे हों फंसे, तबियत ख़राब हो गई …

दीवार पे चींटी!!!

दीवार पे चींटी देख कहते हैं,हमारे घर है हाथी आया! दाना ले जाती चींटी से बोले,हाथी जैसा क्योंकर खाया! लगी सोचने कुछ कहा नहीं,वो अपनी …

मायूस कुन बातें!!!

ज़िंदगी ज़रा देर जो बैठी सुस्ताने,लगी उठने तो पैर लगे कँपकपाने, उसने भरोसा दिलाया इत्मिनान से,कराहना छोड़ कर लगी मुस्कुराने, यक़ीं पर गर्द जल्द बैठ …

प्याज!!!

जिंदगी ब्याज पे और प्याज पे चलती है,छौंके साथ में लौकी आलू मेथी बनती है, आलू रोजमर्रा की दिनचर्या की सब्जी है,बाकी सब्जियां उसी में …

सभ्यता है भी पुरानी???

यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से  निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना  संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …