ठीक आछे!!!
ठीक आछे,सब ठीक आछे,चलो कथा बांचे,सब ठीक आछे, ज़रा ज़रा हांके,आईने में झांके,अपने को आंके,सब ठीक आछे, अंदर तक झांके,क्या हुआ है बांके,चल रहे हैं …
ठीक आछे,सब ठीक आछे,चलो कथा बांचे,सब ठीक आछे, ज़रा ज़रा हांके,आईने में झांके,अपने को आंके,सब ठीक आछे, अंदर तक झांके,क्या हुआ है बांके,चल रहे हैं …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava काली अंधेरी रात,घनघोर घनेरी रात,स्याह बरसती रात,बहकती बरसात, सीप ने मुँह खोला,मादक मन डोला,सीप ने जीवन चाहाबूँद ने जीवन …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava बार बार हरबार,वो कहते जाते हैं,हम सुनते जाते हैं,फिर हम कहते हैं,वो सुनते जाते हैं, चर्चाओं की हमारी लंबी …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava कबूतर जो सधे नहीं,रहे वो अब गधे नहीं,कहते फिरते हैं सबसेकम दामों में गुज़ारा नहीं, जिन्हें फ़ाख़्ते उड़ाने में,आता …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava सफ़र में उनका साथ, हाथों में हाथ,रंज भी ना हो किसी को, तो कैसे मज़ा लीजिये, किस बहर में …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava जब नाम लिखवाया गया,हमारा विद्यालय में,हम दो रहें हैं साथ सदा ही,अपने आलय में, पहला दिन हमारा रोते गुज़रा,कक्षा …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava एक घर बिना दीवार का,बड़ी बड़ी खिड़कियाँ,हैं खुली रहती, चौड़े से दरवाज़ों पे बड़ी सी,है चिटखनी चढ़ी,चैन की घड़ी …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava मकाँ नहीं, अपना घर ढूँढता हूँ,इन ईंटों में जज़्बातों को ढूँढता हूँ, ख़ासा सजा के रख्खा है हमने आशियाँ,और …
Copyright © by Manish Kumar Srivastava बरोठाघर का हो,मन का होया भरोसे का,गुज़रना ही पड़ता है, किवाड़घर का,या अंतर्मन का,राम का रहीम का,खोलना ही पड़ता …