ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

ठीक आछे!!!

ठीक आछे,सब ठीक आछे,चलो कथा बांचे,सब ठीक आछे, ज़रा ज़रा हांके,आईने में झांके,अपने को आंके,सब ठीक आछे, अंदर तक झांके,क्या हुआ है बांके,चल रहे हैं …

सीप…

Copyright © by Manish Kumar Srivastava काली अंधेरी रात,घनघोर घनेरी रात,स्याह बरसती रात,बहकती बरसात, सीप ने मुँह खोला,मादक  मन डोला,सीप ने जीवन चाहाबूँद ने जीवन …

भारत का हिंदुस्तान…

Copyright © by Manish Kumar Srivastava बार बार हरबार,वो कहते जाते हैं,हम सुनते जाते हैं,फिर हम कहते हैं,वो सुनते जाते हैं, चर्चाओं की हमारी लंबी …

चौंसठ पन्ने वाली कॉपी…

Copyright © by Manish Kumar Srivastava जब नाम लिखवाया गया,हमारा विद्यालय में,हम दो रहें हैं साथ सदा ही,अपने आलय में, पहला दिन हमारा रोते गुज़रा,कक्षा …

बरोठा…

Copyright © by Manish Kumar Srivastava बरोठाघर का हो,मन का होया भरोसे का,गुज़रना ही पड़ता है, किवाड़घर का,या अंतर्मन का,राम का रहीम का,खोलना ही पड़ता …