ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

ग्यारह!!

महीने निकले ग्यारह हैं,ये साल बीतने वाला है, इक और इक ग्यारह है,अब वक़्त बदलने वाला है, बीतते तो बस पल ही हैं,दिन साल आज …

दशहरा!!!

तस्वीर राम की सुंदर लग रही है,तासीर राम की असर कर रही है,रावण को तजना ज़िंदगी नहीं है,मन रावण को समझने की,ज़रूरत हमेशा से रही …

पद्म पंकज!!!

आज इक सफ़र कीबात करता हूं,तुमसे जो पायाउसे बयां करता हूं,पायी है ज़ुबां,ज़ुबां खोलने की अदा,तलफ़्फ़ुस में इज़ाफ़ा,अदब का लिफ़ाफ़ा,और जाने क्या क्या, और ये …

बिटिया!!!

कली की तरह खिली,तुम्हारी गोद में मिली,इक छोटी सी आशा,छोटी सांसें भरने लगी,हमें बिटिया मिली!!! प्रफुल्लित हुई ज़िंदगी,हमसे पूछा ज़िंदगी ने,बिटिया पा के ख़ुश हो,हमारी …

महफ़िल!!!

रतजगा है आज महफ़िल में तेरी,आज जोग लगा है महफ़िल में तेरी, आज फिर होगी क़यामत से बातें,क़ायनात बिखरेगी महफ़िल में तेरी, तुझसे मुख़ातिब हैं …