ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

मझधार!!!

इक कश्ती बहकती रही मौजों में,साहिल को बुलाती रही लहरोँ से,मौक़ा देख कर निकल है भागती,लौटना चाहती नहीं वो किनारों पे, उसे पसँद है दांव …

लखनऊ!!!

बे इंतेहा सर्फ़ी सा दुकानदार,सौ साल से भी पुराना व्यापार,पैंतालीस अंश का था तापमान,पारा चढ़ा जा रहा था आसमान,पूछा कि कहां है “सेवा” की दुकान,यहीं …

मुद्रा देव!!!

त्रैता युग ने,रामायण रचाई,और द्वापर में,महाभारत रच आई,आदमी को आदमी की,सुध शायद ना आई… कलयुग ही है ऐसा,जिसमें बोलता पैसा,पैसा खेल अनोखा,पैसे ने  है सिखाया,ये …

बूढ़े!!!

कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …

होली के रँग!!!

आज रंग तन मन,रंग भरो अंतर्मन,मन से मन संगम,हृदय बने विहंगम, आज कर अर्पण,अहंकार भरा मन,होली हो राधे संग,हर दृश्य मनोरम, मुरलीधर वृंदावन,बसे हर राधा …

जंग!!!

दिन गिनते गिनते रात भई,रात भी ना कोई बात हुई,रात गुज़री फिर रात हुई,ना जाने कब वो रात हुई, वक़्त गुज़रा रात ना गई,सारा दिन …