ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

तन्हां, मैं रह गया!!!

बीच अपनों के ही, तन्हां मैं रह गया,टुकड़ा बादल सा, छिटका मैं रह गया, ज़िंदगी खड़ी सामने हंसता मैं रह गया,चाहने वाले कहते, मुझे रोता …

होरी हो रसिया!!!

अवधपुरी से आई रे “गुजरिया”,इंद्रप्रस्थ से आया रे “सांवरिया”,मिलन ये कैसा अद्भुत रसिया,होरी मुबारक़, चखिये गुजिया, आज अवध की होरी है रसिया,उड़त गुलाल रंग भरे …

भारत गणतंत्र!!!

जल वायु अग्नि आकाश धरा,कण कण ऊर्जा संचार हो रहा,असीमित व्यापक विचारधारा,ये धरा है धरोहर की रंगशाला,अनूठा है बाल अनूठी है बाला,हज़ारों साल से गणतंत्र …

नया साल मुबारक़!!!

बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …

दूसरा हिस्सा!!!

बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …