बनावटी इमारतें!!!
रेत के टीलों का पहाड़ बना डाला,लगा जो धसने, बवाल मचा डाला, पत्थर को तौलते हो रेत से मगर,घिस घिस उसे रेतीला बना डाला, घर …
रेत के टीलों का पहाड़ बना डाला,लगा जो धसने, बवाल मचा डाला, पत्थर को तौलते हो रेत से मगर,घिस घिस उसे रेतीला बना डाला, घर …
बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …
गहराए आसमां से झांकता धूप का टुकड़ा,चमकते समंदर पे तैर रहा, बन के धब्बा, लगे के यूं जैसे ज़मीं से अंधेरा रहा हो मिटा,अचानक उस …
बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …
निकल चुकी बात अब हाथ से इंसानों के,ज़हरीली सांस पी रहे हैं अपने मकानों में, आंख मिचिया देता है धुआं सर्द रातों में,ज़हर नशीला फैला …
दिवाली आयी है,हमने सजाई है,अपने द्वारे पे,चौखट चौबारे पे,घर के अंदर में,मन के मंदिर में,जी के समंदर में,घर को संवारेंगे,चौक बनायेंगे,लड़ियां लगायेंगे,अंतर् मन जगायेंगे,मन बसे …
हम उस नस्ल के बंदे हैं,उस फ़सल के नुमाइंदे हैं,जो बस ये सुन के बड़े हुये,थे, अब गुज़रे क़िस्से हैं, हमने ना देखा बापू को,हमने …
ज़िंदगी भी क़ाश तस्वीर की तरह होती,तीन घंटे में हर ग़म, ख़ुशी में तब्दील होती, सारी दुनियादारी पलों में गुज़रती होती,ग़म और ख़ुशी कम कम …
बरसों में ही सही कभी कभी उभरती है,ख़ुश हूँ के टीस उन्हें भी उतनी रहती है, मालूम है रंज ओ ग़म की वक़त उन्हें भी,ये …
इक शाम शरद की,ठंड भी थी पड़ रही,इक शाख़ दरख़्त की,खिड़की से झांक रही,लचीली लोच से भरी,इशारों में कह रही,मुहब्बत हूँ मैं,ज़रा खोल खिड़की… जो …