ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

नया साल मुबारक़!!!

बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …

दूसरा हिस्सा!!!

बादलों पे पैर रख,बादलों के ऊपर,बनायेंगे नये क़िस्से,जो बादलों के परे,उड़ा के ले चलें हमें,वहां से वो सब देखने,गुज़रे वक़्त को समेटने,आते वक़्त की धूप …

दिवाली शुभेक्षाएं!!!

दिवाली आयी है,हमने सजाई है,अपने द्वारे पे,चौखट चौबारे पे,घर के अंदर में,मन के मंदिर में,जी के समंदर में,घर को संवारेंगे,चौक बनायेंगे,लड़ियां लगायेंगे,अंतर् मन जगायेंगे,मन बसे …

बापू!!!

हम उस नस्ल के बंदे हैं,उस फ़सल के नुमाइंदे हैं,जो बस ये सुन के बड़े हुये,थे, अब गुज़रे क़िस्से हैं, हमने ना देखा बापू को,हमने …

बोलती तस्वीर!!!(सिनेमा)

ज़िंदगी भी क़ाश तस्वीर की तरह होती,तीन घंटे में हर ग़म, ख़ुशी में तब्दील होती, सारी दुनियादारी पलों में गुज़रती होती,ग़म और ख़ुशी कम कम …

इक शाख़!!!

इक शाम शरद की,ठंड भी थी पड़ रही,इक शाख़ दरख़्त की,खिड़की से झांक रही,लचीली लोच से भरी,इशारों में कह रही,मुहब्बत हूँ मैं,ज़रा खोल खिड़की… जो …