ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

लखनऊ : शान अवध की!!!

यहां  इमारतें हैं बोलती,यहां  शरारतें हैं डोलती,यहां  सूरतें हैं चहकती,यहां मुहब्बतें हैं महकती, हां, ये शान है लखनऊ की, फ़लसफ़िये हैं हर गलीजिन्हें ज़िंदगी खड़ी …

रिवाज़!!!

वो जो हममें तुममें ख़ास था,वो क्या बस कोई रिवाज़ था, ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था, चाहा था बस अहसास …

परिंदों के आसमां में!!!

परिंदों के आसमां में,उड़ता इक परिंदा,इक इक जोड़ता,तिनका तिनका,ऊंचे दरख़्त पर,बना रहा आशियां,जहां से है दिखता,आसमां, कहकशां,और ढेरों तारों का,झुरमुट बन जाना,हौले हौले टिमटिमाना… ऊंचे …

क्या बताऊँ तुझे!!!

क्या बताऊँ तुझे,कैसे बताऊँ तुझे,के हर बार उस पार,लगती वहां नुमाइशें,पूरी होती फरमाइशें, चल ले चलूं तुझे,के हर पल यूं लगे,के जाना है उस पार,आते …

सभ्यता है भी पुरानी???

यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से  निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना  संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …