ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

क्या बताऊँ तुझे!!!

क्या बताऊँ तुझे,कैसे बताऊँ तुझे,के हर बार उस पार,लगती वहां नुमाइशें,पूरी होती फरमाइशें, चल ले चलूं तुझे,के हर पल यूं लगे,के जाना है उस पार,आते …

सभ्यता है भी पुरानी???

यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से  निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना  संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …

आसमां से गहरी!!!

आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …