गहराया आसमाँ!!!
गहराए आसमां से झांकता धूप का टुकड़ा,चमकते समंदर पे तैर रहा, बन के धब्बा, लगे के यूं जैसे ज़मीं से अंधेरा रहा हो मिटा,अचानक उस …
गहराए आसमां से झांकता धूप का टुकड़ा,चमकते समंदर पे तैर रहा, बन के धब्बा, लगे के यूं जैसे ज़मीं से अंधेरा रहा हो मिटा,अचानक उस …
हम उस नस्ल के बंदे हैं,उस फ़सल के नुमाइंदे हैं,जो बस ये सुन के बड़े हुये,थे, अब गुज़रे क़िस्से हैं, हमने ना देखा बापू को,हमने …
बरसों में ही सही कभी कभी उभरती है,ख़ुश हूँ के टीस उन्हें भी उतनी रहती है, मालूम है रंज ओ ग़म की वक़त उन्हें भी,ये …
आदम की बस्ती में है मौकापरस्ती,हर इंसान, इंसान में इंसान ढूंढ़ते हैं, कितनी सफाई है ज़ुल्मों में उनकी,कराहते हुए दर्द, ज़ख्म ढूंढ़ते हैं, समन्दर में …
इक कश्ती बहकती रही मौजों में,साहिल को बुलाती रही लहरोँ से,मौक़ा देख कर निकल है भागती,लौटना चाहती नहीं वो किनारों पे, उसे पसँद है दांव …
बे इंतेहा सर्फ़ी सा दुकानदार,सौ साल से भी पुराना व्यापार,पैंतालीस अंश का था तापमान,पारा चढ़ा जा रहा था आसमान,पूछा कि कहां है “सेवा” की दुकान,यहीं …
ख़यालों का इक टुकड़ा,क़ैफ़ियत से आ जुड़ा,और ना जाने कब से,बेचैनी है पैदा कर रहा, कोई दे दे वक़्त ज़रा,अंदर तक सोचने का,इधर काफ़ी वक़्त …
तनी हुई डोर पे हल्की ठुनकी,तरंगों की लंबी क़तार बह उठी, ऐसा लगा कि दौरान ए मुहब्बत,इश्क़ की आज़माइशें है हो रही, ज़रा सी ढील …