ज़िंदगी की सरजमीं पर...
व्यंग्य

सभ्यता है भी पुरानी???

यहां आदम के मिले हैं अंडे,यहां आदम अंडे से  निकले,यहां के बहुत बड़े बड़े फंडे,ना छुट्टी ही मनाई ना  संडे, ये सिलसिले चले सदियों तक,फिर …

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …

फलों की बैठक!!!

आज फलों की हुई है बैठक,नतीजा सामने है आने वाला,फल अपनी अपनी हैं कह रहे,सब करते दावे फ़ायदे रहे गिना,अपनी ढपली पे राग अलापना,क्या कोई …