ख़ुद से मुहब्बत कीजिये!!!
बोलने से पहले, तीखा चखा कीजिये,चिकनाई हटेगी ज़ुबां से, मज़ा लीजिये, अनर्गल कभी कभी बड़बड़ा लीजिये,ज़हन पे ज़ोर मगर, आने ना दीजिये, ख़ुद को परेशाँ …
बोलने से पहले, तीखा चखा कीजिये,चिकनाई हटेगी ज़ुबां से, मज़ा लीजिये, अनर्गल कभी कभी बड़बड़ा लीजिये,ज़हन पे ज़ोर मगर, आने ना दीजिये, ख़ुद को परेशाँ …
अग़रचे ये बात होती,दिन में ग़र रात होती,तो रात कभी ना सोती,जो रात कभी ना सोती,वो रात रात ना होती,जब रात रात ना होती,बातों की …
गुलज़ार होती हुई ज़िंदगी है सामने,उस कक्षा का रोज़ इंतेज़ार रहता है,तक़रीबन इक महीना आया गुज़रने,अभी तलक बात कुछ भी हुई नहीं है,जैसे उफ़नती नदी …
दिलपे था उसके ज़ोर, इक इल्ज़ाम दिया था उसे,उसी ने दिया ज़ख़्म जिसने मलहम दिया था उसे, इल्ज़ाम को थामे थामे, वो बिताता रहा ज़िंदगी,जो …
पानी पे पांव के निशा चाहते हैं,ख़ुद से ना जाने हम क्या चाहते हैं ख्वाहिशें बेहिसाब के क्या कहें,उसी में रचा बसा औ गुंधा चाहते …
कुछ ढूंढ रहा हूं…हैं कुछ जज़्बात रखे,ख़त के लिबास में,दिल की दराज़ में…आपस में ये ख़त,हैं गुफ़्तगू करते,किसी के हो रहते,क्यों हैं दराज़ में पड़े… …
छवि जो बन जाती है बचपन में,उम्र भर वो चलती है संग संग में, मालूम होता नहीं हमें बचपन में,हवाला दिया जाता है पचपन में, …
चुभते अहसासों ने आ घेरा,नम आंखों ने बरसना चाहा,यूं चश्मे सा बह जाना चाहा,मासूम इक अश्क़ बहा दिया, वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया… टीस …
तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …
आजकल इक घर में, कई घर हैं बसते,हैं मुख़्तलिफ़ जहाँ, घर के हर कमरे में, अक़्सर, बहस में बदल जाती हैं बातें,हो पाती नहीं गुफ़्तुगू, …