मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

नंदिनी : ऐसा भी होता है!!! भाग १७

आदित्य के जाने के बाद वो सोचती रही,क्या उसका व्यवहार ज़रा ठीक था नहीं,आख़िर दोस्ती में कोई बुराई तो नहीं,और है भी आदित्य बड़ा पदाधिकारी,हालांकि …

नंदिनी : उलझन सुलझे ना!!! भाग १६

“ख़त खुला मजमून पढ़ा ज़िंदगी गुलज़ार,नंदिनी की नींद उड़ी, क्या ये था चमत्कार,” नंदिनी ने क़रीने से खोला ख़त कुछ ऐसे,जैसे प्रणय निकल आएगा उसमें …

नंदिनी : ख़तों की इबारत!!! भाग १५

क्या बात छिड़ी झंकृत हुए तार दिल के,प्रणय नंदिनी से कह रहा याद ये कर के,उस दिन जब हम नैनीताल में थे मिले,क्या पता था …

नंदिनी : दरख़्त की छाँव!!! भाग १४

क्या हुआ उस रात को उसे ना पता चला,वो सरल हृदय ढूंढने में नंदिनी को लगा रहा,ये उसका भृम था या सच या था सपना,यही …

नंदिनी : खिले हुए बुग्याल!!! भाग १३

मिल के यहां प्रणय से उसका है क्या हाल,मुक्तेश्वर में रहता उन्मुक्त घूमता बुग्याल,कुमाऊं का कोई स्थान उसने नहीं छोड़ा था,हिम भूखंडों में खेलना अच्छा …

नंदिनी : मुहब्बत की पेंग!!! भाग १२

नंदिनी सोच रही थी अब वापस जाने की,मन में फ़ितरत थी वहीं समय बिताने की,अजीब ओ ग़रीब असमंजस की घड़ी थी,क्या करे क्या ना करे …

नंदिनी : दादी घर!!! भाग १०

बेरीनाग से आया तार, दादी बीमार,याद तिहारी आ आ के बेचैन बेहाल,दादी का घर पाषाण युग सा सुंदर,वहां घूमते लाल मुंह वाले ढेरों बंदर,दादा दादी …

नंदिनी : बांवरा मन!!! भाग ९

अमलतास गुलमोहर खिल रहा दिल्ली में,रौशन धूप में खिल रहे थे फूल रंग बिरंगे,ख़ुशनुमा माहौल था उसपर दिन सुनहरे,महरौली में दिखे कींकड जंगल अनोखे,बहुत बड़े …

नंदिनी : उधेड़बुन!!! भाग ८

भाग्य का लिखा कभी टल नहीं सकता,अच्छा है या बुरा ये बस समय को पता,हां जाने अन्जाने ही ये फल है कर्मों का,ग़र शिद्दत से …