ज़िंदगी की सरजमीं पर...
तजुर्बे!

अम्मा : प्रगतिशील विचारधारा!!!

ना समझते तो क्या करते,बस शायद हां में हां करते,छोटे अगर जो होते सपने,सपने भी ना होते अपने,खुलापन उनसे पाया हमने,वरना खो जाते हम कबके, …

क़िस्से !!!

इक ज़माने का ज़िक्र छिड़ा,यादों का कारवां चल पड़ा,बीते लम्हों के यादगार पल,ढेरों हैं, ढेरों का सुरूर छाया, कुछ बड़े कुछ हैं छोटे किस्से,हां सही …