अम्मा : प्रगतिशील विचारधारा!!!
ना समझते तो क्या करते,बस शायद हां में हां करते,छोटे अगर जो होते सपने,सपने भी ना होते अपने,खुलापन उनसे पाया हमने,वरना खो जाते हम कबके, …
ना समझते तो क्या करते,बस शायद हां में हां करते,छोटे अगर जो होते सपने,सपने भी ना होते अपने,खुलापन उनसे पाया हमने,वरना खो जाते हम कबके, …
ख़्वाबों को ज़रा सजा कर रखिये,बेतरतीब ख़्वाबों से उलझने है बड़ी, दीवार पे टंगे हैं कई ख़्वाब, मगर,ताबीर में उनके, अड़चने हैं खड़ी, जाल बुनती …
इक ज़माने का ज़िक्र छिड़ा,यादों का कारवां चल पड़ा,बीते लम्हों के यादगार पल,ढेरों हैं, ढेरों का सुरूर छाया, कुछ बड़े कुछ हैं छोटे किस्से,हां सही …