ज़िंदगी की सरजमीं पर...
ख़याल की ज़ुबाँ!

ख़त के लिबास!!!

कुछ ढूंढ रहा हूं…हैं कुछ जज़्बात रखे,ख़त के लिबास में,दिल की दराज़ में…आपस में ये ख़त,हैं गुफ़्तगू करते,किसी के हो रहते,क्यों हैं दराज़ में पड़े… …