ज़िंदगी की सरजमीं पर...
ए ज़िंदगी!

नफ़ासत!!!

क्या ख़ूब सोचकर भेजी ज़िंदा वो तस्वीर,मुहब्बत की जीती जागती उम्दा वो तस्वीर, बे इंतेहा तड़प के साथ ये कह रही तस्वीर,हर सितम पर मुस्कुराती …

सवाब!!!

दिलपे था उसके ज़ोर, इक इल्ज़ाम दिया था उसे,उसी ने दिया ज़ख़्म जिसने मलहम दिया था उसे, इल्ज़ाम को थामे थामे, वो बिताता रहा ज़िंदगी,जो …

तरबियत(परवरिश)!!!

तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …

तरक़श!!!

जो तरक़श में हों तीर,तो समझे हर कोई पीर, पीर ना सताये कभी,जो रखिये थोड़ा धीर, मिल जाये कोई पीर,समझा दे, क्या है नीर, जो …