ये साये हैं!!!
ये साये हैं परछाइयों के,ये पाये(पैर) हैं गहराइयों के,बड़ी देर से ढूढ़ें उचाईयों को,यहां साये कतराते हैं रुसवाइयों से … ये साये हैं….. ये रास्ते …
ये साये हैं परछाइयों के,ये पाये(पैर) हैं गहराइयों के,बड़ी देर से ढूढ़ें उचाईयों को,यहां साये कतराते हैं रुसवाइयों से … ये साये हैं….. ये रास्ते …
यहां इमारतें हैं बोलती,यहां शरारतें हैं डोलती,यहां सूरतें हैं चहकती,यहां मुहब्बतें हैं महकती, हां, ये शान है लखनऊ की, फ़लसफ़िये हैं हर गलीजिन्हें ज़िंदगी खड़ी …
बे इंतेहा सर्फ़ी सा दुकानदार,सौ साल से भी पुराना व्यापार,पैंतालीस अंश का था तापमान,पारा चढ़ा जा रहा था आसमान,पूछा कि कहां है “सेवा” की दुकान,यहीं …