दो बछड़े,
इक आदम का,
इक गाय का,
बोलो क्या खायेगा?
इक खायेगा,
दूध मलाई भर भर,
दूजे ने खाया,
चारा भूसा चर चर,
बोलो कहां जायेगा?
इक जायेगा,
शहर पहाड़ समंदर,
दूजा रहेगा,
अपने छप्पड़ अंदर,
पूछो क्या करेगा?
इक करेगा,
शरारत भर भर,
दूजा रहेगा,
रस्सी में बंध कर,
क्या कुछ सोचेगा,
इक सोचेगा,
रहता हूं मैं शहर,
दूजा चुप रहा,
नहीं कहीं बसर,
दो बछड़ों का,
बस इतना सा सफ़र,
इक का है अपना घर,
दूजा बंधा उसी के दर…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
Nice. All part of creation yet are the human is all except human!
Nice lines
⚘️⚘️