ज़िंदगी की सरजमीं पर...
दिल!!!
दिल!!!

दिल!!!

किसी की थी महफ़िल,
महफ़िल में उनसे मिल,
हैं वो नफ़ीस शख़्सियत,
इक दिन पूछा उन्होंने,
कौन हो तुम,
हमने कहा आपका दिल,

क्या मिलेगा याद करके,
जो ना गुज़ारे साथ पल,
वक़्त है कि बहता चल,
दिन साल हुए अब कल,
पूछा उन्होंने आहिस्ते,
कौन हो तुम,
हमने कहा आपका दिल,

होना ही है जब महरूम, 
वक़्त रहते तो, आ मिल,
मालिक जाने क्या हो कल,
बातें भोली सच्ची सुनकर,
फिर पूछा उन्होंने हमसे,
कौन हो तुम?
हमने कहा आपका दिल,

बेचैन हो क्यों, ढूंढ हल,
कह कर वो गया निकल,
मसला नहीं आसां मगर,
ढूंढ रही नज़र हर पल,
वो पल जो हो गया कल,
बार बार हमसे पूछता था,
कौन हो तुम?
दिल जो ठंडा हो चुका था,
यादों में आ बोला,
हम ही थे आपका दिल,
ज़िंदगी रहते ना सके मिल…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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