ज़िंदगी की सरजमीं पर...
मुस्कुराते दर्द!!!
मुस्कुराते दर्द!!!

मुस्कुराते दर्द!!!

चुभते अहसासों ने आ घेरा,
नम आंखों ने बरसना चाहा,
यूं चश्मे सा बह जाना चाहा,
मासूम इक अश्क़ बहा दिया,

वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया…

टीस ने आ कर धर दबोचा,
नाख़ून गड़ा गड़ा कर नोचा,
अतिशफ़िशां अंदर से फूटा,
नफ़रत ने कैसा सिला दिया,
बिन बात ही लहू बहा दिया,

वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया…

इक ख़याल गिरफ़्त से छूटा,
माशूक़ के घर वो जा पहुंचा,
मुहब्बत से जा लबरेज़ हुआ,
उसे ना रंज ना तंज़ हुआ,
उसने आसमां जो पा लिया,

वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया…

इक तरफ़ थी खाई उसके,
इक ओर गहरा आसमां,
ताक कर देखा ऊपर उसने,
मुहब्बत इबादत और ख़ुदा,
उसने सबको अपना लिया,

वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया…

ख़यालों में उतर रहा इक सेहरा,
चमकता दमकता सा वो चेहरा,
सर्द दर्द और कहीं दर्द सुनहरा,
दर्द ही देर तलक ठहरा किया,
मुहब्बत इक टीस, है बता दिया…

वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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