ज़िंदगी की सरजमीं पर...
पान का पत्ता!!!
पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,
लगा के कत्था,
चूना लगा रहा,
होंठ कर लाल,
कटी है ज़ुबान,
मज़ा आ रहा…

ज़्यादे हो चूना,
कत्था लगाना,
क़िमाम महका,
ज़ायका चटका,
कटी ज़ुबान की,
कैंची है चला रहा…

पान का पत्ता,
बिन कत्थे का,
महका महका,
सुपाड़ी ले रहा,
चूने से कहता,
सफ़ेदपोश बना…

चुना है चूना,
तो लगेगा,
हाथ कटेगा,
ख़ून बहेगा,
जब चूना चुना,
तो क्यों है रोना…

गुनाह जो हुआ,
लाल कर दिया,
ज़मीं का टुकड़ा,
लगा के चूना,
गुनाह दिया मिटा,
पान का पत्ता,
शासक है बड़ा…

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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