ज़िंदगी की सरजमीं पर...
तरक़श!!!
तरक़श!!!

तरक़श!!!

जो तरक़श में हों तीर,
तो समझे हर कोई पीर,

पीर ना सताये कभी,
जो रखिये थोड़ा धीर,

मिल जाये कोई पीर,
समझा दे, क्या है नीर,

जो दिखे खूं आंखों में,
वो रख दे कलेजा चीर,

दिल की बात दिल में,
तो विषय बने गंभीर,

सबक होता तब ठीक,
ना होइये जब अधीर,

जिसकी करें उपासना,
उसी पे आस्था के तीर,

जीवनयुद्ध में लड़े वही,
जाने जो कि, वो है वीर,

फ़ैसले लेने हैं ज़रूरी,
वरना रूह बिन शरीर,

मुहब्बत के मायने क्या,
हर तस्वीर उनकी तस्वीर,

ख़ुशनसीब हैं, ख़्वाब हैं,
ख़्वाबों की अपनी ताबीर,

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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