ऊपरवाला!!!
ऊपरवाला हम सब का इक है,लेकिन हमारा सबमें सर्वश्रेष्ठ है, कैसी विडंबना ये कैसा उत्तेज है,ज़रा सी बात बवंडर बना तेज़ है, सबका तरीक़ा मुख़्तलिफ़ …
ऊपरवाला हम सब का इक है,लेकिन हमारा सबमें सर्वश्रेष्ठ है, कैसी विडंबना ये कैसा उत्तेज है,ज़रा सी बात बवंडर बना तेज़ है, सबका तरीक़ा मुख़्तलिफ़ …
ख़्वाबों को ज़रा सजा कर रखिये,बेतरतीब ख़्वाबों से उलझने है बड़ी, दीवार पे टंगे हैं कई ख़्वाब, मगर,ताबीर में उनके, अड़चने हैं खड़ी, जाल बुनती …
आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …
त्रैता युग ने,रामायण रचाई,और द्वापर में,महाभारत रच आई,आदमी को आदमी की,सुध शायद ना आई… कलयुग ही है ऐसा,जिसमें बोलता पैसा,पैसा खेल अनोखा,पैसे ने है सिखाया,ये …
आज तड़के सुबह हो गयी,आज सांसे भी हैं चल रही,सोचने की फ़ुरसत नहीं,रोटी कमानी है आज की,क्योंकि?इक और दिन ज़िंदगी जो रह गयी, आज तड़के …