ज़िंदगी की सरजमीं पर...
कड़ुवा सच!!!

आसमां से गहरी!!!

आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …

मुद्रा देव!!!

त्रैता युग ने,रामायण रचाई,और द्वापर में,महाभारत रच आई,आदमी को आदमी की,सुध शायद ना आई… कलयुग ही है ऐसा,जिसमें बोलता पैसा,पैसा खेल अनोखा,पैसे ने  है सिखाया,ये …

इक और दिन ज़िंदगी जो रह गयी!!!

आज तड़के सुबह हो गयी,आज सांसे भी हैं चल रही,सोचने की फ़ुरसत नहीं,रोटी कमानी है आज की,क्योंकि?इक और दिन ज़िंदगी जो रह गयी, आज तड़के …