मझधार!!!
इक कश्ती बहकती रही मौजों में,साहिल को बुलाती रही लहरोँ से,मौक़ा देख कर निकल है भागती,लौटना चाहती नहीं वो किनारों पे, उसे पसँद है दांव …
इक कश्ती बहकती रही मौजों में,साहिल को बुलाती रही लहरोँ से,मौक़ा देख कर निकल है भागती,लौटना चाहती नहीं वो किनारों पे, उसे पसँद है दांव …
बे इंतेहा सर्फ़ी सा दुकानदार,सौ साल से भी पुराना व्यापार,पैंतालीस अंश का था तापमान,पारा चढ़ा जा रहा था आसमान,पूछा कि कहां है “सेवा” की दुकान,यहीं …
ख़यालों का इक टुकड़ा,क़ैफ़ियत से आ जुड़ा,और ना जाने कब से,बेचैनी है पैदा कर रहा, कोई दे दे वक़्त ज़रा,अंदर तक सोचने का,इधर काफ़ी वक़्त …
दो बछड़े,इक आदम का,इक गाय का, बोलो क्या खायेगा? इक खायेगा,दूध मलाई भर भर,दूजे ने खाया,चारा भूसा चर चर, बोलो कहां जायेगा? इक जायेगा,शहर पहाड़ …
नदिया किनारे इक गांव,है प्यासा और नहीं छांव, मिट्टी पर, निशां नहीं पांव,नदी सूखी कैसे चले नाव, प्यास है आस, नहीं बरसात,आशा है, विश्वास से …
त्रैता युग ने,रामायण रचाई,और द्वापर में,महाभारत रच आई,आदमी को आदमी की,सुध शायद ना आई… कलयुग ही है ऐसा,जिसमें बोलता पैसा,पैसा खेल अनोखा,पैसे ने है सिखाया,ये …
कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …
आज रंग तन मन,रंग भरो अंतर्मन,मन से मन संगम,हृदय बने विहंगम, आज कर अर्पण,अहंकार भरा मन,होली हो राधे संग,हर दृश्य मनोरम, मुरलीधर वृंदावन,बसे हर राधा …
दिन गिनते गिनते रात भई,रात भी ना कोई बात हुई,रात गुज़री फिर रात हुई,ना जाने कब वो रात हुई, वक़्त गुज़रा रात ना गई,सारा दिन …
आज रूस ने कर दिया हमला,आज कियेव पे भारी बम गिरा, आज जंग का दौर शुरू हुआ,मंद दुनिया का बाज़ार हुआ, आज बख्श दो यूक्रेन …