अग़रचे ये बात होती!!!
अग़रचे ये बात होती,दिन में ग़र रात होती,तो रात कभी ना सोती,जो रात कभी ना सोती,वो रात रात ना होती,जब रात रात ना होती,बातों की …
अग़रचे ये बात होती,दिन में ग़र रात होती,तो रात कभी ना सोती,जो रात कभी ना सोती,वो रात रात ना होती,जब रात रात ना होती,बातों की …
दानिशमंदों की बैठक में एक से एक ख़याल आये,नाराज़ दिखे ज़्यादातर हां ख़ुश भी दो चार आये, मौजूदा वक़्त में तकनीक के मुख़्तलिफ़ रूप दिखे,ज़िंदगी …
कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …
आजकल इक घर में, कई घर हैं बसते,हैं मुख़्तलिफ़ जहाँ, घर के हर कमरे में, अक़्सर, बहस में बदल जाती हैं बातें,हो पाती नहीं गुफ़्तुगू, …
किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …
इक दौर वो और इक दौर ये है,इक ठौर वो और इक ठौर ये है, उधर भी मौज इधर भी मौज है,इक ओर साज़ इक …
पानी के पास ये इख़्तियार नहीं,वो रोक सके ख़ुद को ढुलकने से, और आब ख़ुदमुख़्तार भी नहीं,कि बे मौसम ख़ुद ही बरस सके, है ख़ुद …
वो जो हममें तुममें ख़ास था,वो क्या बस कोई रिवाज़ था, ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था, चाहा था बस अहसास …
पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …
टूटे अहसासों से पीछा छूटता नहीं,बरगद तले भी पनपा है कुछ कहीं, दरख़्त पे यूं, तिलिस्म लटके है कई,ज्यूं इक बदन ढो रहा, लिबास कई, …