ज़िंदगी की सरजमीं पर...
यूँ भी!!!

अग़रचे ये बात होती!!!

अग़रचे ये बात होती,दिन में ग़र रात होती,तो रात कभी ना सोती,जो रात कभी ना सोती,वो रात रात ना होती,जब रात रात ना होती,बातों की …

फ़नकार!!!

दानिशमंदों की बैठक में एक से एक ख़याल आये,नाराज़ दिखे ज़्यादातर हां ख़ुश भी दो चार आये, मौजूदा वक़्त में तकनीक के मुख़्तलिफ़ रूप दिखे,ज़िंदगी …

चैन!!!

कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …

बेल पे चढ़ती छाँव!!!

किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …

रिवाज़!!!

वो जो हममें तुममें ख़ास था,वो क्या बस कोई रिवाज़ था, ना कोई रिश्ता ना ताल्लुक़ात,क्या जानिए वो क्यों नाराज़ था, चाहा था बस अहसास …

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …