ज़िंदगी की सरजमीं पर...
तुम!!!

कचोट!!!

किसी चेहरे पे क़शिश ऐसी पाई,ज़हन में उतरी, ज़िंदगी मिल गयी, जिनसे मिले, परछाईं दिखे उनकी,मिले उनसे तो दुनिया खिल गयी, आग़ोश में दम टूटता …

हे जगन्नाथ!!!

जग चेतन तुम,मन चिंतन तुम,कण कण तुम,हर क्षण तुम, शून्य में तुम,मौन में तुम,असंख्य तुम,अखण्ड तुम, शंखनाद तुम,अंतर मन कीआवाज़ तुम,आग़ाज़ तुम, पार्थ तुम,निस्वार्थ तुम,सुदर्शन …

हर इक शक्ति-रूपेण के नाम!!!

तेरे जैसा नहीं कोई, रखना यक़ीं चाहिये,जो तू कहना चाहे खुल के कहना चाहिये, वजूद तेरा इसलिए नहीं के रहे बंध के,ग़र हो मंज़ूर, बंधन …

इक शाख़!!!

इक शाम शरद की,ठंड भी थी पड़ रही,इक शाख़ दरख़्त की,खिड़की से झांक रही,लचीली लोच से भरी,इशारों में कह रही,मुहब्बत हूँ मैं,ज़रा खोल खिड़की… जो …