ज़िंदगी की सरजमीं पर...
सफ़र!!!

सिफ़र!!!

माथे पर, सिफ़र ठहरा,चांदबाली सा लहरा रहा,बढ़कर रुख़सार चूमता,हो सुर्ख़, कभी दमकता, सिफ़र से सफ़र शुरू हुआ,सिफ़र से बने है कहकशां,सिफ़र से कम, चश्म जमा,ऊपर …

ज़िंदगी का बंदर!!!

ज़िंदगी का बंदर,दिखता है बाहर,रहे चित्त अंदर,हाय रे ये बंदर…मन को खींचकर,आंख को भींचकर,चाहता नहीं देखना,वीभत्स होती नज़र,लगा बुलाने चीख़कर,अपने अंदर का बंदर,वो खींसे निपोड़ …