जग चेतन तुम,
मन चिंतन तुम,
कण कण तुम,
हर क्षण तुम,
शून्य में तुम,
मौन में तुम,
असंख्य तुम,
अखण्ड तुम,
शंखनाद तुम,
अंतर मन की
आवाज़ तुम,
आग़ाज़ तुम,
पार्थ तुम,
निस्वार्थ तुम,
सुदर्शन तुम,
दर्शन तुम,
अजन्मे जन्मे तुम,
हो हम सबमें तुम,
प्रिय वर हो तुम,
घर घर हो तुम,
सर्वस्त तुम,
अभिव्यक्त तुम,
नील नीरज तुम,
अनंत धीरज तुम,
नवकंज लोचन,
संकट मोचन तुम,
सृष्टि धारक तुम,
सृष्टि पालक तुम,
कन्हैया हो तुम,
गोपाला हो तुम,
हृदयनाथ तुम,
दीन के नाथ तुम,
कण स्पंदन तुम,
यशोदा नंदन तुम,
मोर मुकुट साधे
खँजन नयन तुम…
तुम हो तो सब मिले
तुम नहीं तो है प्रलय,
विध्वंसक हो तुम,
सिद्धहस्त हो तुम…
हे जगन्नाथ,
कण तुम क्षण तुम,
प्रति पल प्राण तुम,
सुर लय ताल तुम,
युगांतर काल तुम…
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
jaganath sab jag mein ho tum kya baat