ज़िंदगी की सरजमीं पर...
कचोट!!!
कचोट!!!

कचोट!!!

किसी चेहरे पे क़शिश ऐसी पाई,
ज़हन में उतरी, ज़िंदगी मिल गयी,

जिनसे मिले, परछाईं दिखे उनकी,
मिले उनसे तो दुनिया खिल गयी,

आग़ोश में दम टूटता तो बेहतर था,
इंतेज़ार में ज़िंदगी फिसल गयी,

नींद हरजाई, ख़्वाब आने देती नहीं,
गहरी कचोट थी, हस्ती हिल गयी,

ये दिलों के मुआमले पेंचीदे होते हैं,
वरना टूटने की वजह नहीं दिल की,

है ग़ैरमुमकिन मगर, इक दफ़े सही,
दिल की बात, ज़ुबाँ हू ब हू कहे सही,

इक वो है जिसने धोखा दिया नहीं,
इक दिल है, धोखे में रहना चाहे यूँहीं,

‘मनु’ कहते हैं ये कोई भरम तो नहीं,
मुहब्बत दिल में रखे रखे सिल गयी,

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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