ज़िंदगी की सरजमीं पर...
ख़ुश हूँ!!!
ख़ुश हूँ!!!

ख़ुश हूँ!!!

ख़ुश हूँ तो सज़ा हूँ,
रोता हूँ तो ख़ुदा हूँ,
दिलचस्प शह है ये,
ख़ूब जी रहा हूँ,

दर्द हूँ, अहसास हूँ,
आती जाती साँस हूँ,
कभी कभी तो लगता,
अपनी ही धाँस हूँ,

हाँथों की लकीरों में,
कुरेदी गयी चट्टान हूँ,
किनारा काटती धार,
दरअसल कटान हूँ,

सँग हूँ और मरमराता,
…हुआ सा मैं सँग हूँ,
जो ख़्वाहिशें भर दे,
अजी मैं वही रँग हूँ,

गर्म रक्त हूँ रगों में,
दौड़ता हुआ वक़्त हूँ,
पलकों पे टिका इक,
झपकता सा पल हूँ,

हर पल मस्ती हूँ,
पल पल की ख़ुशी हूँ,
क्यूँ सवाल उठें इसपर
कि मैं पल कैसे जियूँ,

ज़िंदगी मापता कोई,
पर मैं क्यूँकर मापूँ,
छोटी हो या बड़ी हो,
कैसी भी हो, क्यूँ नापूँ,

जवाबदेही खुदा से,
मैं क्या ही कहूँ,
ना देखा है मैंने उसे,
वो जाने मैं कैसे जियूँ,

मेरे भीतर रहता है,
मेरा मन कुछ कहता है,
सुनता हूँ मैं अक़्सर उसे,
और उसे ख़ुदा कहता हूँ,

“मनुशरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

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