ज़िंदगी की सरजमीं पर...
आज़ाद ख़याल!

कहानी!!!

लगातार सिलसिलेवार कहानी,सिलवटें लगी शानदार कहानी,बुर्राख़ क़मीज़ जानदार कहानी,लगता ये है ईमानदार कहानी, गरेबां झांकती पहरेदार कहानी,करिश्मे दिखाती उम्रदार कहानी,हर रोज़ मांजती चमकदार कहानी,देखो है …

पितृ-सत्तात्मक समाज का अंतर्द्वंद!!!

उसने कहा अपने घर आ कर,कि मैं अपने घर से आ रही हूं,मुझे दो पल लेने दो सुकूं ज़रा,बेहद थकी हूं, टूट के आ रही …