करने लगे सजदा,
धीमे से आवाज़ आई,
ऊपरवाला ऊपर रहता,
उठ खड़े हुए फ़ौरन,
दोनों हाथ उठा कर,
मांगने लगे दुआ…
चल रहा रतजगा,
कर्कश ध्वनि में,
चीख चीख बताते व्यथा,
हो हल्ला मगर,
ऊपरवाले को नहीं भाता,
मीठे स्वर क्यों नहीं गाता…
ऊपरवाला लगा सोचने,
लोभी लालची इंसान,
क्यों नहीं देता ध्यान,
कर्म प्रधान समाज में,
बस कर्म ही है चलता,
बांचने से बड़े बड़े पोथा,
भला किसका भला होता…
ऊपरवाला है ऊपर,
और धरती है गोल,
किस दिशा हुआ ऊपर,
कल आज औ कल,
में हर दिशा नीचे,
और हर दिशा ऊपर,
किधर भी कर सजदा,
किसी दिशा हाथ उठा,
चाहे कोई भी हो दशा,
ग़र है मन सच में सच्चा,
फिर कुबूल होगी दुआ…
हे ईश्वर हे मौला!!!
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava