दिल!!!
किसी की थी महफ़िल,महफ़िल में उनसे मिल,हैं वो नफ़ीस शख़्सियत,इक दिन पूछा उन्होंने,कौन हो तुम,हमने कहा आपका दिल, क्या मिलेगा याद करके,जो ना गुज़ारे साथ …
किसी की थी महफ़िल,महफ़िल में उनसे मिल,हैं वो नफ़ीस शख़्सियत,इक दिन पूछा उन्होंने,कौन हो तुम,हमने कहा आपका दिल, क्या मिलेगा याद करके,जो ना गुज़ारे साथ …
आदम की बस्ती में है मौकापरस्ती,हर इंसान, इंसान में इंसान ढूंढ़ते हैं, कितनी सफाई है ज़ुल्मों में उनकी,कराहते हुए दर्द, ज़ख्म ढूंढ़ते हैं, समन्दर में …
इक कश्ती बहकती रही मौजों में,साहिल को बुलाती रही लहरोँ से,मौक़ा देख कर निकल है भागती,लौटना चाहती नहीं वो किनारों पे, उसे पसँद है दांव …
बे इंतेहा सर्फ़ी सा दुकानदार,सौ साल से भी पुराना व्यापार,पैंतालीस अंश का था तापमान,पारा चढ़ा जा रहा था आसमान,पूछा कि कहां है “सेवा” की दुकान,यहीं …
ख़यालों का इक टुकड़ा,क़ैफ़ियत से आ जुड़ा,और ना जाने कब से,बेचैनी है पैदा कर रहा, कोई दे दे वक़्त ज़रा,अंदर तक सोचने का,इधर काफ़ी वक़्त …
दो बछड़े,इक आदम का,इक गाय का, बोलो क्या खायेगा? इक खायेगा,दूध मलाई भर भर,दूजे ने खाया,चारा भूसा चर चर, बोलो कहां जायेगा? इक जायेगा,शहर पहाड़ …
नदिया किनारे इक गांव,है प्यासा और नहीं छांव, मिट्टी पर, निशां नहीं पांव,नदी सूखी कैसे चले नाव, प्यास है आस, नहीं बरसात,आशा है, विश्वास से …
त्रैता युग ने,रामायण रचाई,और द्वापर में,महाभारत रच आई,आदमी को आदमी की,सुध शायद ना आई… कलयुग ही है ऐसा,जिसमें बोलता पैसा,पैसा खेल अनोखा,पैसे ने है सिखाया,ये …
कहा मेरे बच्चे ने,तुम अब बूढ़े हो चले,कुछ दो दशक पहले,अपने पिता के लिये,यही कहा था मैंने, सोचता हूं अब मैं,क्या सोचते होंगे वो,कैफ़ियत क्या …
आज रंग तन मन,रंग भरो अंतर्मन,मन से मन संगम,हृदय बने विहंगम, आज कर अर्पण,अहंकार भरा मन,होली हो राधे संग,हर दृश्य मनोरम, मुरलीधर वृंदावन,बसे हर राधा …