मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

बेल पे चढ़ती छाँव!!!

किसी टहनी से बेल पे चढ़ती छांव,फिर चांदनी ने उजाला बिछाया होगा, किसी ने ग़ैरत को ललकारा जब,किसी ने समाज को जगाया होगा, फिर किसी …

तरक़श!!!

जो तरक़श में हों तीर,तो समझे हर कोई पीर, पीर ना सताये कभी,जो रखिये थोड़ा धीर, मिल जाये कोई पीर,समझा दे, क्या है नीर, जो …

वक़्त!!!

वक़्त, आदमी की इजाद है,बाक़ी सब इससे आज़ाद हैं, दिमाग़ी क़ैद में, वक़्त सोचता,बग़ावत तो करनी ज़ोरदार है, यूं इंक़लाब कर रहा है, वक़्तजैसे वक़्त …