मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

जन्माष्टमी!!!

जमुना में उफ़न रही थी बाढ़,घबराये थे वासुदेव महाराज,कंस के डर का नहीं इलाज,डरा मानुस होत घातक बेहाल,देवकीनन्दन का सोच के हाल,कंडिया में लिटाई के …

मुस्कुराते दर्द!!!

चुभते अहसासों ने आ घेरा,नम आंखों ने बरसना चाहा,यूं चश्मे सा बह जाना चाहा,मासूम इक अश्क़ बहा दिया, वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया… टीस …

तरबियत(परवरिश)!!!

तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …

हर इक शक्ति-रूपेण के नाम!!!

तेरे जैसा नहीं कोई, रखना यक़ीं चाहिये,जो तू कहना चाहे खुल के कहना चाहिये, वजूद तेरा इसलिए नहीं के रहे बंध के,ग़र हो मंज़ूर, बंधन …