इस युग में रावण!!!
रावण ने लिये कई अवतार,पर इस युग में पहली बार,घर के काम की थी दरकार,सरकारी दफ़्तर से इस बार… इक तो था वो सरकारी दफ़्तर,उसपे …
रावण ने लिये कई अवतार,पर इस युग में पहली बार,घर के काम की थी दरकार,सरकारी दफ़्तर से इस बार… इक तो था वो सरकारी दफ़्तर,उसपे …
ना समझते तो क्या करते,बस शायद हां में हां करते,छोटे अगर जो होते सपने,सपने भी ना होते अपने,खुलापन उनसे पाया हमने,वरना खो जाते हम कबके, …
कभी, क़द बड़ा और छोटा साया,कभी, क़द से बड़ा हो गया साया,है ये साया या है किसी की माया,या धूप छांव के खेल ने छलाया… …
है ये शोर का सन्नाटा,यहां हर कोई भन्नाता,है ढपली है राग अपना,औ दूसरों पे चिल्लाता, है ये शोर का सन्नाटा… दरवाज़े पे कान लगाता,आवाज़ें सुन …
कुछ ढूंढ रहा हूं…हैं कुछ जज़्बात रखे,ख़त के लिबास में,दिल की दराज़ में…आपस में ये ख़त,हैं गुफ़्तगू करते,किसी के हो रहते,क्यों हैं दराज़ में पड़े… …
मेरी आहों का ना तज़क़िरा कीजिये,मिलता है सुकूँ आप मुस्कुरा दीजिये, रास आने लगी है हमें, शब ए ग़म,मेरे दर्द की ना कोई दवा कीजिये, …
दूर से आती आवाज़ के जब पास आ गये,बारिश के नदी में उतरने से सैलाब आ गये, ख़ामोश थे लब औ थरथराहट थी सांसों में,हलचल …
जमुना में उफ़न रही थी बाढ़,घबराये थे वासुदेव महाराज,कंस के डर का नहीं इलाज,डरा मानुस होत घातक बेहाल,देवकीनन्दन का सोच के हाल,कंडिया में लिटाई के …
छवि जो बन जाती है बचपन में,उम्र भर वो चलती है संग संग में, मालूम होता नहीं हमें बचपन में,हवाला दिया जाता है पचपन में, …
ख़यालों की ग़ुलामी से हों आज़ाद,हो रही हो बुलंद हमारी आवाज़,अंदर धधकती सी हो हमारे आग,जिस वजह से सोते से जायें जाग, तो हम असल …