मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

पान का पत्ता!!!

पान का पत्ता,लगा के कत्था,चूना लगा रहा,होंठ कर लाल,कटी है ज़ुबान,मज़ा आ रहा… ज़्यादे हो चूना,कत्था लगाना,क़िमाम महका,ज़ायका चटका,कटी ज़ुबान की,कैंची है चला रहा… पान …

आसमां से गहरी!!!

आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …

तन्हां, मैं रह गया!!!

बीच अपनों के ही, तन्हां मैं रह गया,टुकड़ा बादल सा, छिटका मैं रह गया, ज़िंदगी खड़ी सामने हंसता मैं रह गया,चाहने वाले कहते, मुझे रोता …

होरी हो रसिया!!!

अवधपुरी से आई रे “गुजरिया”,इंद्रप्रस्थ से आया रे “सांवरिया”,मिलन ये कैसा अद्भुत रसिया,होरी मुबारक़, चखिये गुजिया, आज अवध की होरी है रसिया,उड़त गुलाल रंग भरे …

भारत गणतंत्र!!!

जल वायु अग्नि आकाश धरा,कण कण ऊर्जा संचार हो रहा,असीमित व्यापक विचारधारा,ये धरा है धरोहर की रंगशाला,अनूठा है बाल अनूठी है बाला,हज़ारों साल से गणतंत्र …