मनु शरद

ज़िंदगी की सरजमीं पर...

मनु शरद

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग १३

बात हद से गुज़र जाये, तो बात नहीं रहती,रात, भरे पूरे दिन में कभी रात नहीं रहती,बादल आ के ढांप ले उजला उजाला अगर,और बरस …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग १२

उन्हें गये, काफ़ी दिन गुज़र चुके थे,हालत में बेचैनी थी उनके इंतेज़ार में,इंकार कि इक़रार नहीं सोच रही मैं,बस एक ख़ुमारी चढ़ी हुई थी मुझपे,परेशानी …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ११

कहते हैं कोशिशें कामयाब होती हैं,कोई क़सर ना रखी क़ोशिश करने में,निकले ही थे पढ़ के उनकी कक्षा से,आवाज़ आयी, अरे अंबरीन ज़रा सुनो,क्या कहा? …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग १०

अगले दिन रोका उन्होंने देख कर मुझे,वो बोले कि मतलब क्या है अलग से?हमने कहा विषय कमज़ोर है मेरे लिये,कहा उन्होंने ठीक है सोच कर …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ९

गुलज़ार होती हुई ज़िंदगी है सामने,उस कक्षा का रोज़ इंतेज़ार रहता है,तक़रीबन इक महीना आया गुज़रने,अभी तलक बात कुछ भी हुई नहीं है,जैसे उफ़नती नदी …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ८

फिर यूँ हुआ इक दिन विश्विद्यालय में,पहला पहला दिन था उसके प्रांगड़ में,मैं जा रही थी एम ए की कक्षा में बैठने,समय हो चला, तेज़ी …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ७

हां, बनारस शहर की ख़ास बात है ये,यहां की बोली में गज़ब की मिठास है,जब कभी लगे के दिल बड़ा उदास है,तो उल्टी बहती हुई …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ६

मन ही मन बड़े जतन ये गुन रही थी मैंक़ाश मिल जाये, जिसकी बांवली थी मैं,पर हुआ ना ऐसा गवां बैठी थी मौका मैं,अपने ही …

दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग ५

क्या चाहिये आपको, क्या माजरा है,बोली मैं आहिस्ते से दुकानदार से,कुछ नहीं बस आती हूं किसी को ढूंढ़ने,दुकानदार ने पूछा आख़िर ढूंढ़ना किसे,ग़र हुलिया बताओ …