दरख़्त के पास वाली दुकान!!! भाग १३
बात हद से गुज़र जाये, तो बात नहीं रहती,रात, भरे पूरे दिन में कभी रात नहीं रहती,बादल आ के ढांप ले उजला उजाला अगर,और बरस …
बात हद से गुज़र जाये, तो बात नहीं रहती,रात, भरे पूरे दिन में कभी रात नहीं रहती,बादल आ के ढांप ले उजला उजाला अगर,और बरस …
उन्हें गये, काफ़ी दिन गुज़र चुके थे,हालत में बेचैनी थी उनके इंतेज़ार में,इंकार कि इक़रार नहीं सोच रही मैं,बस एक ख़ुमारी चढ़ी हुई थी मुझपे,परेशानी …
कहते हैं कोशिशें कामयाब होती हैं,कोई क़सर ना रखी क़ोशिश करने में,निकले ही थे पढ़ के उनकी कक्षा से,आवाज़ आयी, अरे अंबरीन ज़रा सुनो,क्या कहा? …
अगले दिन रोका उन्होंने देख कर मुझे,वो बोले कि मतलब क्या है अलग से?हमने कहा विषय कमज़ोर है मेरे लिये,कहा उन्होंने ठीक है सोच कर …
गुलज़ार होती हुई ज़िंदगी है सामने,उस कक्षा का रोज़ इंतेज़ार रहता है,तक़रीबन इक महीना आया गुज़रने,अभी तलक बात कुछ भी हुई नहीं है,जैसे उफ़नती नदी …
फिर यूँ हुआ इक दिन विश्विद्यालय में,पहला पहला दिन था उसके प्रांगड़ में,मैं जा रही थी एम ए की कक्षा में बैठने,समय हो चला, तेज़ी …
पुरानी बात है और है भी सच, किसी की आंखो देखी है शायद, और हर कालखंड के लिए सार्वभौमिक लगती है… बया के बच्चों को …
हां, बनारस शहर की ख़ास बात है ये,यहां की बोली में गज़ब की मिठास है,जब कभी लगे के दिल बड़ा उदास है,तो उल्टी बहती हुई …
मन ही मन बड़े जतन ये गुन रही थी मैंक़ाश मिल जाये, जिसकी बांवली थी मैं,पर हुआ ना ऐसा गवां बैठी थी मौका मैं,अपने ही …
क्या चाहिये आपको, क्या माजरा है,बोली मैं आहिस्ते से दुकानदार से,कुछ नहीं बस आती हूं किसी को ढूंढ़ने,दुकानदार ने पूछा आख़िर ढूंढ़ना किसे,ग़र हुलिया बताओ …