ज़िंदगी की सरजमीं पर...
सच!!!

दो जून की रोटी!!!

ख़ुद पे ना गुज़रे, मुश्क़िल है समझ पाना,हैं हज़ारों जिन्हें मयस्सर नहीं इक दो दाना, नहीं हासिल, जिसे अच्छा कहे ज़माना,है मुफ़लिसी वो दाग़, मुश्क़िल …

धौकनी!!!

धड़कनें बेचैन और मैं हूं ख़ामोश खड़ा,बेवजह की उलझनों को हूं सुलझा रहा, हैं क्या कुछ ऐसा के जिससे हूं डरा डरा,भूचाल है मेरे अंदर, …

वक़्त और हम!!!

अलग ही अंदाज़-ए-बयाँ है… क्या ये वक़्त चल रहा है,के वक़्त मुसलसल थमा है,वक़्त के हाथ में आईना है,देखता है कि अक़्स अपना है,सोचता हूं, …

सच झूठ!!!

कितने ही सच, झूठे देखे,बिखरे बिखरे से टूटे देखे,किसी को क्या पता था,किसी ने ख़्वाब सुनहरे देखे… कुछ सच्चे लोग, झूठे देखे,फ़रेबी नहीं थे, फ़रेब …

ख़यालों की वज़ाहत!!! (Clarity of Thoughts)

धुआँ धुआँ सा है ख़यालों के दरमियाँ,साफ़ साफ़ देखने का तरीक़ा है क्या? ग़र्द उड़ उड़ के जम रही है ख़यालों पे,हटाने का उसको, मिलता …