ज़िंदगी ज़रा देर जो बैठी सुस्ताने,
लगी उठने तो पैर लगे कँपकपाने,
उसने भरोसा दिलाया इत्मिनान से,
कराहना छोड़ कर लगी मुस्कुराने,
यक़ीं पर गर्द जल्द बैठ जाती है,
रोज़ हर रोज़ जूने से मांजिये इन्हें,
जब तलक हैं, चमक बरक़रार रहे,
कलई चढ़वाते रहिये इसी बहाने,
कभी कभी खर्च कीजिये ख़ुद पे भी,
मुस्कुराने में नहीं लगते इक भी आने,
सौदा भी किया तो किया फ़िक्र का,
उम्र गुज़र गई, लगे रहे तह उतारने,
क़लफ़ किये क़ायदों को सँभालिये,
कौन पूछेगा ग़र माढ़ लगे निकालने,
भुलावे में रहना ज़रूरी है कभी कभी,
दिल हो जाये भारी, लगिये गुनगुनाने,
याद करने में हर्ज़ क्या, ख़ूब करिये,
मुहब्बत को मगर मत चलिये भुनाने,
आइना साफ़ कर के रखिए हमेशा,
हो कुछ, कुछ और ही लगे दिखाने,
सलाहियत से कहें अपने मन की,
मायूस कुन बातें ना रखें सिराहने,
इतनी तनक़ीद ना कीजिये ख़ुद पे,
तारीफ़ कीजिये अपनी किसी बहाने,
हो सके बचिये मनफ़ी गुफ़्तगू से,
कब चढ़ जाये दिमाग़ पे कौन जाने,
सहेज के ना रखिये, बांटिये खुल के,
ख़ुश को नाख़ुश करने, घूम रहे दीवाने,
हर इक बात बेवजह हो नहीं सकती,
गोया नुक़्ताचीं कसने को खुले हैं ज़माने,
“मनुशरद”
Copyright © by Manish Kumar Srivastava
मायूस कुन बातें : उदासी भरी बातें
सलाहियत : काबिलियत/गुण/भलाई
मनफ़ी गुफ़्तगू : नकारात्मक बातें
नुक़्ता चीं/तनक़ीद : कटाक्ष/त्रुटि निकालना
बद ग़ुमानी : अविश्वास /संदेह
गोया : वैसे ही/मानो इसलिये
Wah! Bhai kya baat!