ज़िंदगी की सरजमीं पर...
सियासत!!!
सियासत!!!

सियासत!!!

कुछ दीवानों का साथ अज़्मत है,
कोई बात है उनमें जो शानदार है,

कहीं से कहीं खींची बातों में,
जो मुज़्मर है, वही यादगार है,

तजवीज़े मिली उन्हें भूलाने की ,
बसे हैं दिल में दिल गुनहगार है,

आलीशान चमकती मंज़िलों में,
तिजारत बसती है वो शानदार है,

किसे सही कहें क्या है ग़लत,
फ़लक़ के सितारों में धुआँधार है,

आवाम की बेहतरी के वास्ते,
सियासत की नौकरी जानदार है,

हालातों का क्या कहें किसी से,
हलक़ में फसें काँटे ज़ोरदार हैं

जबसे बने हैं कोतवाल शहर के,
फ़रमाँबरदारों पे रौनकें बरक़रार हैं,

चोरी करने की भला सोचें ही क्यूँ ,
सरकार में हम भी तो हिस्सेदार है,

महबूब के घर से आया है पैग़ाम,
आये लिफ़ाफ़े, ख़ासे वज़नदार हैं,

आप सरकार आपके क्या कहने,
आप तो ख़ुद में ही चमत्कार है,

सोचते हैं मनु कहे तो कैसे कहें भई,
नहीँ जवाब आपका आप लाजवाब हैं,

“मनु शरद”

Copyright © by Manish Kumar Srivastava

अज़मत : बड़प्पन
मुज़्मर : गुप्त/ छुपा हुआ
तजवीज़ : राय देना
तिजारत : सौदागिरी

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